स्वास्थ्य

जरा संभलकर: गोरा करने वाला केसर ही ना ले ले बच्चे की जान, कब और कितना करें सेवन?

प्रेगनेंसी में अक्सर महिलाओं के गोल्डन स्पाइस यानि केसर खाने की सलाह दी जाती है ताकि बच्चा गोरा व सुदंर पैदा हो। माना जाता है कि गर्भवती महिला के लिए केसर खाना बहुत फायदेमंद होता है। वहीं, इसमें कई ऐसी औषधियां होती हैं, जो चिंता, तनाव, और पेट दर्द जैसे लक्षणों से लड़ने में मदद करती है। मगर, मॉडरेशन में ना खाया केसर प्रेग्नेंट महिला को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

जरा संभलकर: गोरा करने वाला केसर ही ना ले ले बच्चे की जान, कब और कितना करें सेवन?

प्रेगनेंसी में अक्सर महिलाओं के गोल्डन स्पाइस यानि केसर खाने की सलाह दी जाती है ताकि बच्चा गोरा व सुदंर पैदा हो। माना जाता है कि गर्भवती महिला के लिए केसर खाना बहुत फायदेमंद होता है। वहीं, इसमें कई ऐसी औषधियां होती हैं, जो चिंता, तनाव, और पेट दर्द जैसे लक्षणों से लड़ने में मदद करती है। मगर, मॉडरेशन में ना खाया केसर प्रेग्नेंट महिला को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

​क्‍या प्रेग्‍नेंसी में केसर खा सकते हैं?

केसर में ऐसे कई औषधीय गुण होते हैं जो गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होते हैं। दूध में केसरप मिलाकर खाने से तनाव, शरीर का दर्द व ऐंठन, मूंड स्विंग और अन्य परेशानियों से आराम मिलता है लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन कॉन्‍ट्रैक्‍शन और प्रीमैच्‍योर डिलीवरी का खतरा बढ़ा देता है।

केसर की कितनी मात्रा रहेगी ठीक?

केसर से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है इसलिए 2 या 3 रेशे से ज्यादा इसका यूज ना करें। साथ ही प्रेगनेंसी के 3 महीने के बाद ही केसर का सेवन शुरू करें। दूसरी और तीसरी तिमाही में रोजाना 20-30 mg केसर का यूज किया जा सकता है। 1 ग्राम केसर में करीब 400 रेशे मिलेंगे। जिसमें से 30 एमजी पूरे एक महीने तक चल सकता है। केसर के 8-10 रेशे 30 एमजी के बराबर होते हैं।

​इन बातों का रखें ध्‍यान

चूंकि, केसर हानिकारक भी साबित हो सकता है इसलिए प्रेगनेंसी डाइट में इसे शामिल करने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है जैसे –

-5वें महीने के बाद ही केसर लेना शरू करें क्‍योंकि इस समय तक गर्भ ठहर जाता है, जिससे गर्भपात का खतरा कम होता है।
-किसी भी चीज में केसर के 2-3 धागे ही इस्तेमाल करें क्योंकि इससे ज्यादा सेवन नुकसानदायत साबित हो सकता है।
– आर्टिफिशिय कलर वाला या अशुद्ध केसर भी हानिकारक होता है इसलिए हमेशा अच्छी क्वालिटी का ही केसर खरीदें।

जरा संभलकर: गोरा करने वाला केसर ही ना ले ले बच्चे की जान, कब और कितना करें सेवन?

प्रेगनेंसी में अक्सर महिलाओं के गोल्डन स्पाइस यानि केसर खाने की सलाह दी जाती है ताकि बच्चा गोरा व सुदंर पैदा हो। माना जाता है कि गर्भवती महिला के लिए केसर खाना बहुत फायदेमंद होता है। वहीं, इसमें कई ऐसी औषधियां होती हैं, जो चिंता, तनाव, और पेट दर्द जैसे लक्षणों से लड़ने में मदद करती है। मगर, मॉडरेशन में ना खाया केसर प्रेग्नेंट महिला को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

​क्‍या प्रेग्‍नेंसी में केसर खा सकते हैं?

केसर में ऐसे कई औषधीय गुण होते हैं जो गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होते हैं। दूध में केसरप मिलाकर खाने से तनाव, शरीर का दर्द व ऐंठन, मूंड स्विंग और अन्य परेशानियों से आराम मिलता है लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन कॉन्‍ट्रैक्‍शन और प्रीमैच्‍योर डिलीवरी का खतरा बढ़ा देता है।

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केसर की कितनी मात्रा रहेगी ठीक?

केसर से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है इसलिए 2 या 3 रेशे से ज्यादा इसका यूज ना करें। साथ ही प्रेगनेंसी के 3 महीने के बाद ही केसर का सेवन शुरू करें। दूसरी और तीसरी तिमाही में रोजाना 20-30 mg केसर का यूज किया जा सकता है। 1 ग्राम केसर में करीब 400 रेशे मिलेंगे। जिसमें से 30 एमजी पूरे एक महीने तक चल सकता है। केसर के 8-10 रेशे 30 एमजी के बराबर होते हैं।

​इन बातों का रखें ध्‍यान

चूंकि, केसर हानिकारक भी साबित हो सकता है इसलिए प्रेगनेंसी डाइट में इसे शामिल करने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है जैसे –

-5वें महीने के बाद ही केसर लेना शरू करें क्‍योंकि इस समय तक गर्भ ठहर जाता है, जिससे गर्भपात का खतरा कम होता है।
-किसी भी चीज में केसर के 2-3 धागे ही इस्तेमाल करें क्योंकि इससे ज्यादा सेवन नुकसानदायत साबित हो सकता है।
– आर्टिफिशिय कलर वाला या अशुद्ध केसर भी हानिकारक होता है इसलिए हमेशा अच्छी क्वालिटी का ही केसर खरीदें।

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प्रेगनेंसी में केसर खाने के फायदे

. सामान्य प्रसव चाहती हैं तो चौथे महीने से केसर वाला दूध पीना शुरू कर दें।
. केसर पाचन क्रिया मजबूत, आंखों की रोशनी बढ़ाने, सही ब्लड सर्कुलेशन, हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल, मॉर्निंग सिकनेस दूर करने में भी मददगार है।
. इसमें में क्रॉसटिन और पोटेशियम व एंटीऑक्सीडेंट्स होता हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करके दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
. इससे प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है, जिससे एनीमिया का खतरा कम होता है।
. गर्भावस्था में तनाव के कारण ज्यादातर महिलाओं को नींद नहीं आती लेकिन केसर का सेवन इसमें आपकी मदद कर सकता है।

​प्रेग्‍नेंसी में केसर खाने के नुकसान

1. केसर गर्भाशय में संकुचन कर सकता है जिससे गर्भपात और प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा रहता है।
2. इससे शरीर का तापमान और हीट बढ़ जाती है, जिससे प्रीमैच्‍योर लेबर की दिक्कत भी हो सकती है।
3. कई बार केसर से तनाव, चक्‍कर आना, मुंह में सूखापन, मतली-उल्टी और सिरदर्द हो सकती है, जिससे शिशु तक पोषण नहीं पहुंच पाता। अगर ऐसा हो तो केसर का सेवन तुरंत बंद कर दें।
4. केसर की वजह से नाक से खून आना या एलर्जी की दिक्कत भी हो सकती है।
5. इसके अलावा केसर के कारण हाथ-पैरों का सुन्‍न होना, पीलिया, दस्‍त और पेशाब या मल में खून आने की समस्या भी हो सकती है।

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केसर खाने के बाद दिखें ये लक्षण तो डॉक्टर से करें संपर्क

– नाक, होठ या आंखों से खून निकलना
– सुन्न या शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ना
– पेशाब में खून आना
– बार-बार चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना