#विद्या बालन जी ने ऐसा क्यों कहा- वो ख़ुद को धार्मिक नहीं बताना चाहतीं।।..

जानी-मानी अभिनेत्री विद्या बालन जी का यह कहना है कि विज्ञान और धर्म में टकराव होने की बजाय दोनों एक साथ भी रह सकते हैं।

विद्या बालन जी ने एक समाचार में दिए हुए इंटरव्यू में कहा है कि एक व्यक्ति की पहचान कई तरह की हो सकती है। लेकिन जिस तरह से लोग धर्म को अपनी सुविधा के नुसार तोड़-मरोड़ के देखते हैं, वो अपने आप में ही एक बड़ी समस्या है।

विद्या जी कहती हैं की , “मुझे लगता है जिस तरह से लोग धर्म की भाषा कर रहे हैं, वह एक बड़ी समस्या है। मैं ऐसे कई लोगों को जानती हूं जो ख़ुद को धार्मिक कहने से बचते हैं। मैं उनमें से ही एक हूं। मुझे हमेशा से ही ऐसा लगता था कि मैं किसी को बताना नहीं चाहती कि मैं भी धार्मिक हूं। मैं हमेशा अपने आप को अध्यात्मिक बताती हूं।””धर्म को एक नकारात्मक तरह देखा जाने लगा है, क्योंकि धार्मिक होना भी असहिष्णु होने के समान हो गया है।”

मंगल मिशन फिल्म में विद्या बालन जी तारा शिंदे की भूमिका निभा रही हैं और उनका किरदार विज्ञान पर तो विश्वास करता ही है साथ ही साथ विज्ञान से परे ईश्वर की शक्ति पर भी विश्वास करता है ।

mission mangal.

विद्याजी कहती हैं, “हम सब लोगों को ख़ुद से ये सवाल करने की ज़रूरत है कि हमारे विचार कितने स्वतंत्र हैं.मुझे ऐसा लगता है कि हम स्वतंत्र तो रहना चाहते हैं लेकिन दूसरों को अपने नियंत्रण में भी रखना चाहते हैं.मुझे लगता हे की यह आज़ादी नहीं है….ऐसी कई ग़लत बातें हैं जो हमारे सामने घट रही हैं और जिन्हें देख कर हमें ग़ुस्सा आता है.सोशल साइट पर हीदेख लीजिए, जो कुछ भी कहा जाता है लोग उसे बुरा मान जाते हैं.”

मिशन मंगल फिल्म 15 अगस्त को रिलीज़ हो गयी है फ़िल्म में अक्षय कुमार, विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, नित्या मेनन, कीर्ती कुल्हारी मुख्य भूमिकाए निभा रही हैं।

विद्या जी कहती हैं कि उनका किरदार कुछ ऐसा है। कि वो एक गृहणी के तौर पर अपने अनुभवों को अपने काम में इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश करती हैं।

विद्या जी कहती हैं कि अपने किरदार को निभाने के लिए निर्देशक जगन शक्ति के किए गए शोध पर उंन्होने पूरा भरोसा किया है।

“मैंने निर्देशक की बहन से भी बात की है जो इसरो में काम करती हैं। मेरे लिए ये समझना बेहद ज़रूरी था कि वो अपने दफ्तर ओर घर को
यानी वैज्ञानिक के तौर पर अपनी भूमिका और एक गृहिणी के तौर पर अपने काम के बीच संतुलन कैसे कर पाती हैं।”

” मिशन मंगल फ़िल्म के लिए जगन ने सैंकड़ों वैज्ञानिकों से मुलाक़ात भी की थी और मुझे लगता है कि उन्होंने मिशन के लिए ज़रूरी जानकारी एकत्र की। इसके बाद जगन, आर बाल्की और टीम ने मिल कर मिशन मंगल के आधार को समझने की कोशिश की।”

यह फ़िल्म भारत के मंगल तक पहुंचने के सफ़र को यानी मार्स ऑर्बिटर मिशन मंगलयान की सफल उपलब्धि दिखाती है। विद्या जी मानती हैं कि ऐसे हे और भी कहानियों पर फ़िल्में बननी चाहिए।

फिल्म ओर राट्रवाद के एक साथ आने के मुद्दे पर विद्या जी कहती हैं “राष्ट्रवाद सिनेमा में होना चाहिए न की सिनेमा के बाहर होना चाहीए। सिनेमा हॉल में ऐसी कई चीज़ें हैं जिन पर भारतीय गर्व कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करते है । जब आप पूरी दुनिया घूमते हैं तभी आपको पता चलता है कि संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के मामले में हमारा भारत कितना धनी है।”

ओर वे कहती हैं, “इसे बनाए रखने, इसका प्रचार करने के कई ओर भी तरीक़े हैं। इसके जरिए पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। हमें इस देश के नागरिक होने की ख़ुशी मनानी चाहिए।”

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